Director's Profile

Director Sir३० अक्टूबर २०२४ से श्री गोविंदराम सेक्सरिया टेक्नोलॉजी संस्थान इंदौर में निदेशक के पद पर कार्यरत डॉ नीतेश पुरोहित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान प्रयागराज में प्रोफेसर के पद से ५ वर्ष के लिए डेपुटेशन पर है। भारत के महामहिम राष्ट्रपति ने देश के सभी ३० राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (NITs) में शिक्षकों की नियुक्ति करने वाली समिति में वर्ष २०२३ में प्रो पुरोहित को अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया, तब से आज तक १० NITs में आपने लगभग ५० शिक्षक नियुक्ति समितियों में सहभागिता की है।उत्तर प्रदेश सरकार के कोविड प्रबंधन पर आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर एक पुस्तक लिखी जिसका विमोचन माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने मंत्रालय सभागार में किया और जिसकी प्रशंसा पूरे देश में हुई। २०१७ से २०२५ तक प्रो पुरोहित आईआईटी कानपुर की ऐकडेमिक एथिक्स समिति के सदस्य रहे। प्रयागराज महाकुंभ २०२५ के नोडल ऑफिसर के रूप में सेलुलर नेटवर्क प्लानिंग, वेबसाइट और मोबाइल ऐप सुपरविजन, सुरक्षा और इमरजेंसी प्लानिंग, इत्यादि दायित्वों का निर्वहन किया।२०२४ में प्रो पुरोहित की टीम को ६G की भारतीय तकनीकी (Semantic Communication) विकसित करने के लिए भारत सरकार के टेलीकम्युनिकेशन विभाग (DoT) ने वित्तीय सहयोग स्वीकृत किया है। प्रो नीतेश ने 3D प्रिंटर के एक भारतीय मॉडल को विकसित करके यह तकनीकी भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री (ITI) मनकापुर को स्थानांतरित की। इसका व्यावसायिक उत्पादन किया जा रहा है। C३i-Hub आईआईटी कानपुर द्वारा देश भर में साइबर सिक्योरिटी विषय के पठन-पाठन, और इनक्यूबेशन प्रमोशन एक्टिविटीज में सहभागिता एवं मॉनिटरिंग हेतु प्रो नीतेश को २०२२ में चुना गया है। साथ ही IoT सिक्योरिटी का फ्रेमवर्क बनाने हेतु वित्तीय सहयोग दिया गया। प्रो पुरोहित ने IIIT प्रयागराज में की गई सुगंध के मूल घटको में विभाजन संबंधित रिसर्च में सहभागिता की और इस तकनीकी द्वारा किसी सुगंध को किसी वस्तु के ट्रेडमार्क के रूप में रजिस्टर करने हेतु गठित टीम का नेतृत्व करते हुवे २०२६ में गुलाब के फूल की खुशबू का ग्राफिकल रिप्रजेंटेशन करके एक कंपनी को इसका ट्रेडमार्क दिलवाया।२०२६ में भारत सरकार शिक्षा मंत्रालय के IKS विभाग के वित्तीय सहयोग से मध्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा के अध्ययन का कार्य शुरू किया है। २०२५ में मध्यप्रदेश सरकार के वित्तीय सहयोग से DRI चित्रकूट के साथ मिलकर कामद परियोजना पर कार्य प्रारम्भ किया है। वर्ष २०२२-२४ में भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के वित्तीय सहयोग से प्रयागराज और वाराणसी के एससी/एसटी समाज के स्वरोजगार हेतु कई कार्य किये।IEEE Transactions, IEEE letters सहित कुछ अतिविशिष्ट जर्नल्स में प्रकाशित कई शोध पत्र, अनेक आमंत्रित व्याख्यान, वीडियो लेक्चर, लैब डेमो, इत्यादि ऑनलाइन उपलब्ध है।